Mahakali Sangathan Chhattishgarh
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महाकाली संगठन का गठन
सेवा सर्वत्र साध्यते , सेवदानम जगतसुखम !!
संगठन की उत्त्पति
संस्थापक डॉ. सार्थक राठौर जी के कलम से .... !!
महाकाली संगठन की स्थापना सन 2013 में हुई। संगठन के संस्थापक डॉ. सार्थक राठौर जी की वर्तमान और दूरदर्शी सोच ने जाज्वल्य देव की धारा में 2013 में एक बीज बोया, जो आज एक विशाल वट वृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है। इस बीज की मजबूत जड़ों को दक्षिणेश्वर माँ काली आश्रम के प्रमुख, माँ काली उपासक श्रद्धेय सनत गुरुजी एवं संत स्वामी सुरेंद्रनाथ जी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्री पंचदशनाम गुरु दत्त अखाड़ा) के संरक्षण का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
महाकाली संगठन रूपी यह वट वृक्ष इतना विशाल हो चुका है कि इसकी शाखाओं और पत्तों की गिनती करना कठिन हो गया है। यह संगठन सेवा के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को छाया (सेवा) प्रदान कर सके, इसी संकल्पना और परिकल्पना के साथ डॉ. सार्थक राठौर जी ने संगठन की नींव रखी। वे बताते हैं कि सेवा, संगठन, संस्कृति और अध्यात्म के प्रति उनकी सोच उनके दादा गुरु, प्रातः स्मरणीय श्रद्धेय चंद्रिका गुरुजी से प्रेरित है, जिन्होंने अपने जीवनभर परोपकार और जनसेवा को प्राथमिकता दी। उन्हीं की प्रेरणा से महाकाली संगठन का उदय हुआ।
समाज के लिए कुछ करने की सोच आना और उसे क्रियान्वित करने हेतु संगठित होना सेवा कार्य को आसान बनाता है, परंतु संगठन को निर्मित कर लोगों को जोड़कर संगठित रखना अत्यंत कठिन कार्य है। संगठन के शुरुआती दिनों में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि किसी भी संगठन को तीन प्रमुख तत्वों - तन, मन और धन की आवश्यकता होती है। तन और मन की उपलब्धता थी, लेकिन धन का प्रबंध करना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद, छोटे-छोटे कार्य निरंतर चलते रहे। आत्मविश्वास और समाज के लिए कुछ करने की चाह ही थी, जिसने संगठन के सभी सदस्यों को सेवा कार्यों में योगदान देने की प्रेरणा दी। सीमित संसाधनों के बावजूद, संगठन के सभी सदस्य राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और भारतीय संस्कृति के विचारों के साथ आज भी सेवा कार्य में लगे हुए हैं।
प्रारंभ में संगठन केवल जांजगीरनगर (छत्तीसगढ़) तक सीमित था, फिर पूरे जांजगीर जिले में विस्तार हुआ और धीरे-धीरे यह प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंच गया। संगठन की मजबूती और नई ऊर्जा के लिए 8 अक्टूबर 2024, मंगलवार (नवरात्रि के छठवें दिन, माता कात्यायनी का दिन) को प्रदेश स्तरीय विशेष कार्यकारी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन का पुनर्गठन, नवीन पदाधिकारियों की घोषणा एवं स्वागत कार्यक्रम संपन्न हुआ। तब से लेकर अब तक संगठन विभिन्न सेवा क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।